कुछ हाल हे, कुछ यहां बेहाल हे
मेरा तो हर हाल में बस यहीं सवाल हे,
रोज उसकी यादे क्यु आए मुजे तरसाने
अब ख्वाब भी तो लगे हुए हे मुजे मुस्कुराने
हरतरफ अब तो यहा उसी की ही जाल हे…… कुछ
हाथो मे हाथ लेके हम चलते रेहते सावन में
धीरे धीरे पहोंच रहे थे महोब्बत के हम आंगन में
यकीन हे मुजे की ए दिल की ही कोइ चाल हे……कुछ .
होठो पे होठ रखदु तो एसे ही भीग जाएंगे
बादल बीना मौसम के एसे ही गरज पाएंगे
खुद से होती अब यहां देखो मीठी बबाल हे….कुछ .