युं महेंगाई मे ए जिंदगी अब जिए केसे?
थोडी मुक्त थोडी उधार ए जिंदगी लीए केसे?
बागो मे लगे नही अब तक आम,
और पेट्रोल का बढा चला हे दाम,
नशा भी ना हो वो मीक्स शराब अब पीए केसे ?
भ्रष्ट हुए हे लोग सारे, ईमान के नाम पे,
छोद दी हे ईज्जत सारी हर बदतर काम मे,
फटी हुई ए बेहाल इज्जत अब सीए केसे ?
मुन्नी- शीला के बीना पिक्चर अब चलती हे कहां ?
कदर करे कला की वो बस्ती अब बसती हे कहां ?
रिअल आर्ट ए दुप्लीकेट मार्केट मे अब जीए केसे ?
फीर भी सब खुश हे और खुश ही रहेंगे,
हर दम लोग वो ही जिंदगी जिएंगे,
अच्छी सोच की आशा यहां अब कीए केसे?
Written By- विवेक टांक